सब्ज़ परी।

sabz pari story in Hindi.एक राजा के तीन पुत्र थे। दो पुत्र शादीशुदा थे परन्तु तीसरा पुत्र जिसका नाम मीरजादा था अभी कंवारा था। मीरजादा की एक भाभी चाहती थी की वह उसकी बहन से विवाह कर ले। परन्तु मीरजादा मानता नहीं था। एक दिन भाभी ने ताना मारते हुए कहा,”जा देखेंगे जब तू कोई सब्ज़ परी विवाह करके ले आएगा।” इस पर मिरजादा ने भी गुस्से होकर कहा,”मैं अब सब्ज़ परी से ही विवाह करवाउंगा।”

उसी वक्त मीरजादा घोड़े पर बैठ कर सब्ज़ परी को ढूँढने के लिए चल पड़ा। चलते-चलते वह एक घने जंगल में पंहुचा। वहाँ पर वह एक वृक्ष के निचे बैठ कर आराम करने लगा। अचानक उसे एक बड़े सांप के फुंकारने के आवाज़ सुनाई दी। वह सांप मीरजादे को डसने ही वाला था की मीरजादे ने अपनी तलवार से उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

उस वृक्ष के उपर एक हँस और हँसनी रहते थे। वह साँप उनके बच्चों को मारकर खा जाता था। जब हँस और हँसनी ने मीरजादे के हाथों से साँप को मरते हुए देखा तो सुख का सांस लिया। उन्होंने मीरजादे से कहा,”हे भले मानव, आपने हमारे उपर बहुत बड़ा उपकार किया है। हमें बताये की हम आपकी क्या सहायता कर सकते है?” मीरजादे ने सब्ज़ परी के साथ विवाह करवाने की बात हँस जोड़े को बता दी।

हँस और हँसनी को सब्ज़ परी के देश के बारे में पता था। वह कई बार उड़ते-उड़ते हुए वहाँ गए थे। हँस ने कहा,”मैं आपको अपने पंखो पर बैठा कर सब्ज़ परी के देश लेकर जाऊंगा।”

अगले दिन हँस मीरजादे को अपने पंखो पर बैठाकर उड़ चला। रास्ता बहुत लम्बा था। रास्ते में अनेक समुंदर और पहाड़ आये। वह कई दिन तक उड़ता रहा। आखिर में वह सब्ज़ परी के देश में पहुच गए। हँस ने मीरजादे को एक वृक्ष के निचे आराम करने के लिए उतार दिया। अपने वह उड़ कर आसपास देखने लगा। उसने देखा की एक नदी में कुछ परियाँ नहा रही थी और उनके पंख नदी के किनारे पड़े हुए थे।

हँस उड़कर मीरजादे के पास पंहुचा। उसने मीरजादे से कहा,”सब्ज़ परी के महल तक यह परियाँ ही पंहुचा सकती है। परन्तु वह ऐसे नहीं मानेंगी। पहले आप नदी के किनारे पड़े उनके पंख उठा लेना। फिर उनको इस शर्त पर पंख वापिस करेंगे की वह सब्ज़ परी को आपसे विवाह करने के लिए उसे मनाएंगी।”

मीरजादे ने नदी के किनारे पड़े परियों के पंख उठा लिए। जब परियाँ नहा कर बाहर आयीं तो अपने पंखो को वहाँ न देखकर बहुत परेशान हुई। मीरजादे ने फिर उनके सामने आकर कहा की उनके पंख उसके पास है। वह पंख तभी वापिस करेगा अगर वह उसका विवाह सब्ज़ परी से करवाएंगी।

मीरजादे ने एक परी के पंख वापिस कर दिए। वह परी उड़कर सब्ज़ परी के पास पहुची। उसने सब्ज़ परी के पास जाकर उसको सारी बात बताई। सब्ज़ परी बड़ी हैरान हुई की इतनी दूर से कोई लड़का यहाँ कैसे आ गया था।

वह उसी वक्त उस स्थान पर पहुची जहाँ पर मीरजादा खड़ा था।

उसने जब सुन्दर और बांके नौजवान मीरजादे को देखा तो वह उसके साथ विवाह करवाने के लिए राज़ी हो गयी। सब्ज़ परी ने मीरजादे से विवाह करवाने के लिए परियों वाले कपड़े और पंख उतार दिए और मनुष्यों वाले कपड़े पहन लिए। अब उसमे पहले जैसे उड़ने की शक्ति नहीं रही।

हँस उन दोनों को बैठा कर उड़ नहीं सकता था। वह एक नाव में बैठकर समुंदर के रास्ते मीरजादे के देश की ओर चल पड़े। चलते-चलते कुछ दिन बीत गए। एक दिन समुंदर में बहुत भयानक तूफ़ान आया। इसमें उनकी नाव डूब गयी और वह तीनो बहते-बहते दूर चले गए और एक दुसरे से बिछड़ गए। तीनो एक दुसरे से बिछुड़ के बहुत उदास हुए। हँस ने उन दोनों को ढूँढने का फैसला किया।

उधर जब लोगों ने सब्ज़ परी को देखा तो उसकी सुन्दरता के बारे में वहाँ के राजा को जाकर बताया। राजा ने जब सब्ज़ परी को देखा तो वह उसके उपर मोहित हो गया और उसे अपने महल में ले गया। उसने सब्ज़ परी से अपने साथ विवाह करवाने के लिए कहा। सब्ज़ परी ने उत्तर दिया की वह पहले से ही ब्याही हुई है।

राजा ने कहा की उसका पति तो मर चूका है। सब्ज़ परी ने कहा की उसका मन इस बात को नहीं मानता। फिर भी उसने विवाह के बारे में ‘हां’ करने के लिए राजा से एक साल की मोहलत मांग ली। तब राजा ने सब्ज़ परी को एक अलग महल में रहने की आज्ञा दे दी और नौकरों-चाकरों से कह दिया की वह सब्ज़ परी की हर आज्ञा का पालन करे।

सब्ज़ परी ने सोच-सोच कर अपने पति और हँस को ढूँढने के लिए एक तरकीब सोची। उसने अपने महल की छत के उपर पंछियों के लिए भांति-भांति के दाने फ़ेंक दिए और साथ ही सच्चे मोतियों का ढेर लगा दिया। ऐसा उसने इसलिए किया क्योंकि वह जानती थी की वह हँस सच्चे मोती खाकर ही अपनी भूख मिटाता था। इसलिए वह एक न एक दिन दाना चुगने के लिए जरूर यहाँ आएगा।

हर रोज भांति-भांति के पंछी वहाँ आते और दाना चुग कर चले जाते। पंछियों ने दाने की खबर दूर तक फैला दी थी। इस प्रकार दूर-दूर से पंछी भी आने लग पड़े। एक दिन हँस भूख से व्याकुल होकर सच्चे मोतियों की तलाश कर रहा था की उसे एक पंछियों का झुण्ड आता हुआ दिखाई दिया। पंछियों ने उसे बताया की एक स्थान पर बहुत सारे सच्चे मोती पड़े हुए है। तब हँस उनके साथ उड़कर सब्ज़ परी के महल में आ गया। उसने बड़े चाव से सच्चे मोती खाए। अचानक सब्ज़ परी के नज़र हँस पर पड़ी। हँस और सब्ज़ परी ने एक दुसरे को पहचान लिया। दोनों एक दुसरे से मिलकर बहुत खुश हुए। अब वह मीरजादे को ढूँढना चाहते थे।

हँस हर सवेरे मीरजादे को ढूँढने के लिए उड़ता और दूर-दूर तक जाता परन्तु रात को निराश होकर उसे लौटना पड़ता था।

उधर मीरजादा एक भठीयारन के घर पहुच गया। उसके कपड़े फट गए थे। उसने भठीयारन से कहा,”माई तू मुझे खाने के लिए कुछ दे देना। मैं तेरे लिए चूल्हा जलाने के लिए जंगलो में से लकड़ी ले आया करूँगा।” भठीयारन को उस पर बड़ी दया आई और उसने मिरजादे को खाने के लिए रोटी दिया। मीरजादा सब्ज़ परी के बगैर अपने देश नहीं जाना चाहता था, इसलिए वह वही पर रह गया।

एक दिन जंगल में वह लकड़ी काट रहा था। उधर हँस भी मीरजादे की तलाश में जंगल-जंगल, गाँव-गाँव फिर रहा था। उसने मीरजादे को देखा। चाहे मीरजादा काफी कमजोर हो गया था फिर भी हँस ने उसे पहचान लिया। मीरजादे ने भी हँस को पहचान लिया। हँस ने मीरजादे को सब्ज़ परी की सारी विथ्या सुनाई। मीरजादा हँस के पंखो के ऊपर बैठकर सब्ज़ परी के पास पंहुचा। दोनों मिल कर बड़े प्रसन्न हुए।

मीरजादा और सब्ज़ परी दोनों हँस की मदद से रात को राजा के महल में से चोरी से निकल आये। अपने शहर के नजदीक पहुँच कर मीरजादे ने हँस को विदा कर दिया। मीरजादे ने अपने पिता को संदेशा भेजा की वह सब्ज़ परी को वियाह कर ले आया है, उसके स्वागत का प्रबन्ध किया जाये।

वह दोनों वहाँ एक बाग़ में आराम करने लग पड़े। सब्ज़ परी को प्यास लगी। वह बगीचे में बने कुएँ में पानी पिने के लिए गयी। वहाँ पर एक मालिन रहती थी। मालिन बड़ी चालाक थी। उसने सब्ज़ परी से पूछा की वह कौन है? सब्ज़ परी ने जब उसे बताया की वह मीरजादे की पत्नी है तो मालिन ने उसी वक्त एक साज़िश सोच लिया। उसने सब्ज़ परी से कहा की आप यहाँ बेफिक्र होकर नहा धो ले, यहाँ कोई नहीं आता है।

जब सब्ज़ परी नहाने लगी तो मालिन ने उसे कुएँ में धक्का दे दिया। सब्ज़ परी पानी में गोते खाने लगी। मालिन ने सब्ज़ परी के कपड़े पहन लिए और उसके जैसा ही श्रृंगार करके बाग़ में मीरजादे के पास चली गयी। जब मीरजादे ने उसके चेहरे को देखा तो हैरान होकर कहने लगा,” तुझे क्या हो गया है? तेरा रंग-रूप क्यों बदल गया है?

मालिन ने रोते हुए कहा,”मुझे साँप ने काट लिया है, शायद उसके ज़हर के कारण मेरा रंग काला हो गया है। कुछ समय पश्चात यह अपने आप ठीक हो जायेगा”।

मीरजादे को कुछ समझ नहीं आ रहा था। कुछ देर पश्चात मीरजादे का पिता बाजे-गाजे के साथ अपने पुत्र और पुत्रवधू को लेने आ गया। लोक सब्ज़ परी बनी मालिन के कपड़ो को देखकर वाह-वाह करते रहे। पर मीरजादा उदास हो गया था। अब उसे सब्ज़ परी का कोई चाह नहीं रह गया था। इसी प्रकार दिन बीतते गए।

एक दिन मिरजादा उसी बाग़ के कुएँ के नजदीक घूम रहा था, जहाँ मालिन ने सब्ज़ परी को धक्का दिया था। मीरजादे को एक साँप दिखाई दिया। मीरजादे ने सोचा की शायद यह वही साँप है, जिसने सब्ज़ परी को डंसा था। साँप जल्दी से कुएँ की ओर चला गया। मिरजादा जब कुएँ के पास पंहुचा तो उसे उस कुएँ में एक बहुत ही सुंदर कमल का फूल नज़र आया। जब मिरजादे ने फूल को तोड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो फूल निचे हो गया। मीरजादा हार कर जब वापिस जाने लगा तो जैसे फूल अपने आप ही उसके हाथ में आ गया। मीरजादा फूल को लेकर अपने महल में आया। जब मालिन ने इस अलोकिक फूल को देखा तो वह समझ गयी की यह सब्ज़ परी का ही कौतक है। वह उसी वक्त सिर पकड़ कर बैठ गयी और ज़ोर-ज़ोर से रोने लग गयी।

मीरजादे के पूछने पर कहने लगी,” इस फूल को देखकर मेरे सिर में बहुत पीड़ा हो रही है। यह फूल मेरे लिए पनौती है। इस फूल को तोड़-मरोड़ के दूर जंगल में फ़ेंक आओ।” मीरजादे ने वैसे ही किया।

कुछ दिन पश्चात मीरजादा शिकार खेलता-खेलता जंगल के उस ओर चला गया जहां उसने फूल को तरोड़-मरोड़ के फेंका था। उसने वहाँ देखा की उस स्थान पर फूलो का बहुत सुन्दर बगीचा बना हुआ है। वह वहाँ थोड़ी देर ही बैठा की उसकी आँख लग गयी। अचानक ही उसके कानो में नाचने गाने की आवाज़ सुनाई दी, वह उसी दिशा की ओर चलने लग पड़ा जहा से यह आवाज़ आ रही थी। वहाँ जाकर उसने देखा की कई सारी परियां वहाँ पर नाच रही थी। जब परियां नाच के उड़ने लगी तब एक परी ने कहा,” सखियों जाने से पहले मेरी एक नसीहत याद रखना, कभी भी आदम जात पर विश्वाश मत करना। इनसे कभी भी प्यार ना करना। यह बहुत धोकेबाज़ होते है।”

मीरजादे ने आवाज़ को पहचान लिया। यह सब्ज़ परी ही थी। वह दौड़ कर उसके पास गया और कहने लगा,” तू यहाँ है तो मेरे पास कौन रह रहा है?” सब्ज़ परी कहने लगी,” मैंने तेरे लिए अपना देश और सुख-चैन छोड़ा पर तू मालिन और सब्ज़ परी में फर्क ना समझ सका। मैं फूल बन के तेरे पास आई पर तुमने मुझे बाहर फ़ेंक दिया।” यह कहते हुए सब्ज़ परी ने अपनी दुःख भरी सारी कहानी सुनाई। मीरजादे को बहुत गुस्सा आया। वह उसी वक्त महल में गया। उसने मालिन को धक्के मार कर अपने घर में से निकाल दिया। फिर वह सब्ज़ परी के साथ खुशी-खुशी रहने लगा।

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